INDIA alliance – Delhi Aaj Kal https://www.delhiaajkal.com Delhi Ki Awaaz Sat, 14 Oct 2023 18:11:19 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=6.7.2 https://i0.wp.com/www.delhiaajkal.com/wp-content/uploads/2022/11/Black-minimalist-michael-vescera-logo.png?fit=32%2C32&ssl=1 INDIA alliance – Delhi Aaj Kal https://www.delhiaajkal.com 32 32 212602069 BJP wants to put India alliance in the dock by targeting Rahul Gandhi in Sanatan case. https://www.delhiaajkal.com/bjp-wants-to-put-india-alliance-in-the-dock-by-targeting-rahul-gandhi-in-sanatan-case/ https://www.delhiaajkal.com/bjp-wants-to-put-india-alliance-in-the-dock-by-targeting-rahul-gandhi-in-sanatan-case/#respond Sat, 14 Oct 2023 18:11:15 +0000 https://www.delhiaajkal.com/?p=2923

सनातन मामले में राहुल गांधी को निशाना बनाकर इंडिया गठबंधन को कठघरे में खड़ा करना चाहती है भाजपा

विनय कुमार

दिल्ली आजकल ब्यूरो, दिल्ली
4 सितंबर 2023

तमिलनाडू के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन के बेटे और राज्य के खेल एवं युवा मामलों के मंत्री उदयनिधि स्टालिन के सनातन धर्म को लेकर दिये गए बयान को भाजपा पांच राज्यों के चुनाव से पहले अपने लिए एक वरदान की तरह मान रही है. उसे उम्मीद है कि इसके सहारे वह छत्तीसगढ़, मध्यप्रदेश, राजस्थान और तेलंगाना में हिंदू वोटों के धुव्रीकरण में कामयाब होगी. यही वजह है कि उसने अपने सभी नेताओं को इस मामले में कांग्रेस पर हमला करने के लिए आगे कर दिया है. भाजपा इस मामले में खासकर राहुल गांधी को निशाना बनाकर समस्त इंडिया गठबंधन को कठघरे में खड़ा करना चाहती है. हालांकि उसकी समस्या यह है कि राहुल गांधी ने इस मामले में कोई भी बयान या प्रतिक्रिया नहीं दी है. संभवत: कांग्रेस को भाजपा की रणनीति का आभाष हो गया है. जिसकी वजह से राहुल गांधी की ओर से फिलहाल तक इस मामले पर कोई बयान सामने नहीं आया है.

भाजपा यह जानती है कि उत्तर भारत में सनातन मामले को लेकर वोटों का धु्व्रीकरण किया जा सकता है. वह यह भी जानती है कि उत्तर भारत में अगर वह इस मामले को लेकर स्टालिन जूनियर पर हमला करेगी तो उसे उसका बहुत अधिक राजनीतिक लाभ नहीं होगा. भाजपा को यह भी पता है कि तमिलनाडू में उसकी कोई उपस्थिति नहीं है. ऐसे में वहां पर उसके बयान का कोई औचित्य ही नहीं है. उत्तर भारत में उसे इस मामले को भुनाने के लिए किसी ऐसे चेहरे की जरूरत है. जिस पर दोष मढ़ने से उसका वोटर खुश हो और उसके पक्ष में मत करने के लिए प्रेरित हो. यही वजह है कि भाजपा ने राहुल गांधी को इस मामले में चुप्पी तोड़ने की सलाह देते हुए यह चुनौती भी दी है कि उनको इस मामले पर अपना पक्ष रखना चाहिए. यही नहीं, भाजपा ने उत्तर भारत की राजनीति को ध्यान में रखते हुए नीतीश कुमार, ममता बनर्जी, अरविंद केजरीवाल को भी कठघरे में खड़ा करने का प्रयास किया है. उसका सबसे अधिक ध्यान लेकिन राहुल गांधी पर है. इसकी वजह यह है कि कांग्रेस और राहुल गांधी इंडिया गठबंधन की धुरी है. भाजपा को उम्मीद है कि इस मामले में राहुल गांधी पर हमला कर वह समस्त इंडिया गठबंधन को कठघरे में खड़ा कर सकती है. जिसका लाभ उसे आने वाले समय में मिल सकता है.

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Challenge of remaining neutral before regional parties in general elections https://www.delhiaajkal.com/challenge-of-remaining-neutral-before-regional-parties-in-general-elections/ https://www.delhiaajkal.com/challenge-of-remaining-neutral-before-regional-parties-in-general-elections/#respond Sat, 14 Oct 2023 17:59:28 +0000 https://www.delhiaajkal.com/?p=2917

आम चुनाव में क्षेत्रीय दलों के सामने तटस्थ बने रहने की चुनौती

विनय कुमार

दिल्ली आजकल ब्यूरो, दिल्ली
12 अगस्त 2023

आम चुनाव 2024 को लेकर तेज होती हलचल के बीच क्षेत्रीय और छोटे दलों के लिए तटस्थ बने रहना मुश्किल होता दिख रहा है. जिस तरह से एनडीए और इंडिया गठबंधन अपना कुनबा बढ़ाने में जुटे हुए हैं. उससे क्षेत्रीय दलों के सामने अकेले रहकर इन दोनों बड़े गठबंधन का सामना करना चुनौती बनता जा रहा है. यही वजह है कि कुछ समय पहले तक जो क्षेत्रीय दल स्वयं को गठबंधन की राजनीति से अलग रखने का दावा कर रहे थे. वे क्षेत्रीय दल भी प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से इन गठबंधनों के साथ खड़े होते दिख रहे हैं.

आम आदमी पार्टी ने यह दावा किया था कि वह कांग्रेस के साथ नहीं जाएगी. लेकिन जब उसने देखा कि देश के तमाम क्षेत्रीय दल कांग्रेस के नेतृत्व में एक मजबूत गठबंधन बनाने की दिशा में बढ़ रहे हैं. ऐसे में उसने भी दिल्ली सेवा बिल पर समर्थन के बहाने कांग्रेस के साथ नजदीकी बढ़ाने का अवसर तलाश लिया. इस समय कांग्रेस और आम आदमी के बीच वैचारिक दूरी भी कम होती दिख रही है. दोनों ही दल एक दूसरे के लिए मजबूती से आवाज उठाते दिख रहे हैं. इसी तरह से एनडीए और कांग्रेस नीत गठबंधन से दूरी बनाने का दावा करने वाले बीआरएस के संस्थापक और तेलंगाना के मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव भी इंडिया गठबंधन की ओर झुकते हुए नजर आ रहे हैं. हालांकि उन्होंने औपचारिक रूप से इस गठबंधन से नाता नहीं जोड़ा है. लेकिन जिस तरह से वह सरकार के खिलाफ विभिन्न नीतियों पर इंडिया गठबंधन की तरह ही लाइन ले रहे हैं. उससे यह संकेत मिलता है की देर सवेर वह भी इंडिया गठबंधन में शामिल हो सकते हैं.

वहीं दूसरी ओर , वाईएसआर कांग्रेस पार्टी- तेलुगु देशम पार्टी और बीजू जनता दल भाजपा नीत एनडीए गठबंधन की ओर बढ़ते हुए नजर आते हैं. बीजू जनता दल ने तो केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की ओर से प्रस्तुत तीन नए कानूनों के समर्थन में जिस तरह से अपना पक्ष रखा. उसे अपना भरपूर समर्थन दिया. उससे यह संकेत मिलते हैं कि आम चुनाव के दौरान भले ही बीजू जनता दल और भाजपा अलग चुनाव लड़े. लेकिन चुनाव के बाद अगर जरूरत हुई तो भाजपा नीत एनडीए को बीजू जनता दल का समर्थन मिलना निश्चित है. इसी तरह से वाईएसआर कांग्रेस पार्टी ने भी खुले रूप में भाजपा को अपना समर्थन देना शुरू कर दिया है. जिससे यह संकेत मिलते हैं कि वह नहीं चाहती है कि राज्य में तेलुगू देशम के साथ भाजपा का कोई गठबंधन हो. उसे डर है कि अगर तेलुगू देशम पार्टी एनडीए में चली जाती है तो उसे राज्य में इसकी कीमत चुकानी पड़ सकती है. तेलुगू देशम को एनडीए जैसे बड़े गठबंधन की ताकत हासिल हो सकती है. जिससे हाशिए पर जाती तेलुगू देशम को नया जीवन मिल सकता है. इसके अलावा उसे यह डर भी है कि अगर तेलुगू देशम पार्टी एनडीए का हिस्सा हो जाती है. ऐसे में वाईएसआर कांग्रेस पार्टी को इस समय केंद्र सरकार से राज्य की विभिन्न योजनाओं के लिए जो आर्थिक सहायता मिल रही है. उसमें भी बाधा आ सकती है. जिसका वाईएसआर कांग्रेस पार्टी की राजनीतिक स्थितियों पर विपरीत असर पड़ सकता है. यही वजह है कि उसने खुलकर एनडीए का साथ देना शुरू कर दिया है. इससे भाजपा के पास आंध्र प्रदेश में तेलुगु देशम और वाईएसआर कांग्रेस के रूप में दो विकल्प उपलब्ध हो गए हैं. भाजपा अपनी सुविधा और लाभ के लिहाज से इनमें से किसी एक दल का चुनाव कर सकती है.

इधर, तेलुगू देशम पार्टी भी इस प्रयास में लगी है कि वह एनडीए का हिस्सा हो जाए. उसे यह उम्मीद है कि ऐसा होने पर उसे एनडीए की ताकत मिलेगी. जिससे वह राज्य में वाईएसआर कांग्रेस पार्टी के खिलाफ फिर से एक बड़ी ताकत बनकर सामने आ पाएगी. यहां यह भी उल्लेखनीय है कि उसने खुले तौर पर भाजपा के साथ जाने को लेकर इनकार नहीं किया है. इसी तरह से संसद में वोटिंग के दौरान अनुपस्थित रहकर राष्ट्रीय लोकदल के नेता जयंत चौधरी ने भी अपने विकल्प खुले रखने का संकेत दिया है. यह माना जा रहा है कि राष्ट्रीय लोक दल इस समय वर्तमान परिस्थितियों का आकलन कर रही है. जिसके आधार पर वह आने वाले समय में इन दोनों बड़े गठबंधन में से बेहतर को चुनने का निर्णय कर पाए. यह कहा जा रहा है कि रालोद संभवत एनडीए को चुन सकता है. हालांकि जयंत चौधरी ने फिलहाल अपने पत्ते नहीं खोले हैं. इन दलों के अलावा शिरोमणि अकाली दल के सामने भी पंजाब में अपना अस्तित्व बचाए रखने की चुनौती बनी हुई है. उसके सामने यह समस्या है कि अगर वह इंडिया गठबंधन के साथ जाती है तो पंजाब में उसका जनाधार पूरी तरह से खत्म होने का संकट उत्पन्न हो सकता है. ऐसे में उसके सामने केवल एनडीए में शामिल होने या फिर अकेले चुनाव लड़ने का विकल्प बचता है. यह माना जा रहा है कि देर सवेर अकाली दल भी एनडीए का दामन थाम सकता है. अकाली दल लंबे समय तक एनडीए का साथी रहा है. किसान आंदोलन के समय वह एनडीए गठबंधन से अलग हो गया था.

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Aam Aadmi Party’s demonstration at BJP headquarters, BJP workers prayed at Rajghat https://www.delhiaajkal.com/aam-aadmi-partys-demonstration-at-bjp-headquarters-bjp-workers-prayed-at-rajghat/ https://www.delhiaajkal.com/aam-aadmi-partys-demonstration-at-bjp-headquarters-bjp-workers-prayed-at-rajghat/#respond Thu, 05 Oct 2023 12:28:44 +0000 https://www.delhiaajkal.com/?p=2822

आम आदमी पार्टी का भाजपा मुख्यालय पर प्रदर्शन, भाजपा कार्यकर्ताओं ने की राजघाट पर प्रार्थना
दिल्ली आजकल ब्यूरो, दिल्ली

आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह की गिरफतारी का विरोध करने के लिए आम आदमी पार्टी के हजारो कार्यकर्ताओं ने भाजपा मुख्यालय पर प्रदर्शन किया. वह संजय सिंह की रिहाई की मांग कर रहे थे. इसके अलावा उनका यह भी कहना था कि आने वाले पांच राज्यों के चुनावों में इंडिया गठबंधन की जीत से भयभीत भाजपा और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने डर की वजह से यह कदम उठाया था.

दूसरी ओर, भाजपा के नेताओं और कार्यकर्ताओं ने राजघाट पर धरना देने के साथ ही प्रार्थना भी की. उन्होंने कहा कि महात्मा गांधी शराब के विरोधी थे. आम आदमी पार्टी कहती है कि वह महात्मा गांधी के मार्ग को मानते हैं. लेकिन दूसरी तरफ वह शराब को अपने लिए धन कमाने का माध्यम बना रही है. शराब घोटाला इसका जीवंत प्रमाण है. भाजपा नेताओं ने कहा कि उनकी प्रार्थना सभा का उददेश्य यह है कि भगवान आम आदमी पार्टी के नेताओं को सदबुद्धि प्रदान करे. जिससे वे शराब से कमाई के गलत मार्ग से हटकर जनता के हित में कार्य करने संबंधी उचित मार्ग पर आएं.

इस बीच, भाजपा और आम आदमी पार्टी के बीच संजय सिंह के अरेस्ट को लेकर आरोप—प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गए हैं. दोनों ही दल के नेता एक—दूसरे पर राजनीति से प्रेरित होकर कार्रवाई का आरोप लगा रहे हैं. 

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Sharad Pawar to solve Congress-AAP tussle over Delhi Lok Sabha seats ! https://www.delhiaajkal.com/sharad-pawar-can-become-a-bridge-between-congress-and-aam-aadmi-party-in-india-alliance/ https://www.delhiaajkal.com/sharad-pawar-can-become-a-bridge-between-congress-and-aam-aadmi-party-in-india-alliance/#respond Thu, 05 Oct 2023 08:57:58 +0000 https://www.delhiaajkal.com/?p=2802

इंडिया गठबंधन में कांग्रेस और आम आदमी पार्टी के बीच सेतु बन सकते हैं शरद पवार 

दिल्ली आजकल ब्यूरो, दिल्ली 

5 अक्टूबर 2023

इंडिया गठबंधन में शामिल कांग्रेस और आम आदमी पार्टी के बीच तकरार बनी हुई है. दोनों ही दल दिल्ली में सीटों के बंटवारे को लेकर आपस में उलझे हुए हैं. यह माना जा रहा है कि अगर इन दलों के बीच यह लड़ाई सुलझ जाती है तो फिर इन दोनों के दरम्यान पंजाब और हरियाणा का भी झगड़ा नहीं रहेगा. लेकिन कांग्रेस दिल्ली में आम आदमी पार्टी को कोई भी सीट देने के लिए तैयार नहीं है. इस बीच एनसीपी संस्थापक इन दोनों दल के बीच मध्यस्तता कराने की भूमिका में आते दिख रहे हैं. उन्होंने दोनों दलों के बीच दिल्ली में सीट बंटवारे को लेकर जमी बर्फ पिघलाने की पहल की है. उन्होंने कहा कि दोनों दलों के बीच समझौता हो सकता है. इसके लिए बस वक्त का इंतजार किया जाना चाहिए. इस समय निर्णय पर पहुंचना उचित नहीं कहा जा सकता है.

शरद पवार  ने कहा है कि उनको स्वयं दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कहा है कि  वह लोकसभा की 7 में से 4 सीटें छोड़ने को तैयार हैं-. वह अपनी ओर से पहल करने को तैयार हैं. शरद पवार का यह बयान ऐसे समय में आया है. जब ईडी ने आम आदमी पार्टी के नेता संजय सिंह को गिरफतार कर लिया है. वहीं इस मामले में दिल्ली प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अरविंदर सिंह लवली ने कहा है कि वह ईडी की जांच के खिलाफ नहीं है. शराब घोटाले की शिकायत कांग्रेस ने ही की थी. अगर किसी ने गलत किया है तो उसे जेल जाना चाहिए. लवली ने यह भी कहा कि लेकिन जिस तरह से संजय सिंह को गिरफतार करने को सही ठहराया गया है. वह उसके खिलाफ है. जांच एजेंसी ने कहा कि वह जांच में सहयोग नहीं कर रहे हैं. आखिर यह कैसे तय होता है कि कोई सहयोग कर रहा है या नहीं कर रहा है. यह जांच एजेंसी का दुरूपयोग है. उनके बयान पर आम आदमी पार्टी के कई नेताओं ने कहा कि कांग्रेस को यह बताना चाहिए कि वह इंडिया गठबंधन के अपने साथी के साथ है या फिर भाजपा का साथ दे रही है. यह गोल—मोल जवाब क्याों दिया जा रहा है.

हालांकि जानकारों का कहना है कि कांग्रसे की दिल्ली और पंजाब इकाई शुरू से आम आदमी पार्टी के साथ गठबंधन के खिलाफ है. ऐसे में लवली का बयान उसी चिर—परिचित पंक्ति पर था. इस समय दिल्ली के सबसे बड़े दिग्गज कांग्रेसी नेता अजय माकन खुले तौर पर दिल्ली में केजरीवाल की पार्टी के साथ किसी भी तरह के सहयोग या गठबंधन से इनकार कर चुके हैं. इसी तरह पंजाब में भी प्रताप सिंह बाजवा और प्रदेश अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा आम आदमी पार्टी के साथ किसी भी तरह के सहयोग या समझौता के खिलाफ है. उस बीच केजरीवाल की ओर से शरद पवार को कही गई बात को स्वयं पवार की ओर से सार्वजनिक किये जाने को लेकर कहा जा रहा है कि आम आदमी पार्टी संकट के इस समय में विपक्ष और कांग्रेस से परोक्ष रूप से मदद चाहती है. यही वजह है कि पवार ने ऐसी टाइमिंग पर बयान दिया है. जब आम आदमी पार्टी के तीसरे बड़े नेता को जांच एजेंसी ने गिरफतार किया है. यह देखना होगा कि इस समय पवार के इस रहस्योदघाटन पर आम आदमी पार्टी और अरविंद केजरीवाल की क्या प्रतिक्रिया रहती है. 

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Pashupati Kumar Paras will go with India alliance https://www.delhiaajkal.com/pashupati-kumar-paras-will-go-with-india-alliance/ https://www.delhiaajkal.com/pashupati-kumar-paras-will-go-with-india-alliance/#respond Wed, 27 Sep 2023 08:06:19 +0000 https://www.delhiaajkal.com/?p=2686

इंडिया गठबंधन के साथ चले जाएंगे पशुपति कुमार पारस

दिल्ली आजकल ब्यूरो , दिल्ली 

27 सितंबर 2023

ऐसे समय में जब बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के एनडीए में आने को लेकर फिर से चर्चा हो रही है. भाजपा के बिहार से एक प्रमुख सहयोगी और इस समय केंद्र सरकार में मंत्री पशुपति कुमार पारस के आने वाले समय में इंडिया गठबंधन में जाने की अटकलें शुरू हो गई है. उनका अपने भतीजे और सांसद चिराग पासवान के साथ हाजीपुर सीट को लेकर झगड़ा चल रहा है. इस समय चिराग पासवान जमुई सीट से सांसद हैं.लेकिन वह अगला चुनाव अपने पिता की परंपरागत सीट रही हाजीपुर से लड़ना चाहते हैं. जबकि इस समय पारस वहां से सांसद हैं. यह माना जा रहा है कि पारस और चिराग के बीच यह सीट प्रतिष्ठा की सीट बन गई है. ऐसे में अगर सीट बंटवारे में भाजपा ने यह सीट पारस को नहीं दी तो वह इंडिया गठबंधन में जा सकते हैं.

सूत्रों के मुताबिक पशुपति कुमार पारस ने हाल ही में नीतीश कुमार के एनडीए में आने को लेकर बयान दिया. जिसमें उन्होंने कहा कि अगर नीतीश कुमार एनडीए में आते हैं तो उनका स्वागत है. यह माना जा रहा है कि पारस ने यह बयान नीतीश कुमार में एनडीए में आने के लिए नहीं दिया था. वह इस बयान के बहाने भविष्य में अपने लिए इंडिया गठबंधन में जगह बनाने का प्रयास कर रहे थे. बिहार में जातिगत राजनीति को ध्यान में रखते हुए भाजपा राज्य की उन सभी छोटी पार्टियों को अपने साथ रखना चाहती है. जिसका अपनी जाति पर प्रभाव है. यही वजह है कि उसने यहां की लगभग सभी छोटी पार्टियों को अपने गठबंधन में शामिल कर लिया है. इन दलों में लोक जनशक्ति पार्टी के दोनों धड़े चिराग पासवान और पशुपति कुमार पारस गुट शामिल हैं. भाजपा का आकलन है कि दोनों के साथ आने से पासवान वोट एकमुश्त एनडीए को मिल सकता है. लेकिन इस बीच चाचा पशुपति कुमार पारस और भतीजे चिराग पासवान के बीच रामविलास पासवान की विरासत का प्रतीक हाजीपुर सीट को लेकर झगड़ा इतना बढ़ गया है कि पारस ने दो टूक कहा है कि उनके दिल में चिराग के लिए कोई जगह नहीं है. यही नहीं, उन्होंने यह भी कहा कि कुछ भी हो जाए. वह हाजीपुर से चुनाव लड़ेंगे. जबकि चिराग ने भी इस सीट पर दावा ठोंक दिया है. जिस तरह से भाजपा की ओर से चिराग पासवान को तवज्जों दी जा रही है. उसे देखते हुए यह माना जा रहा है कि भाजपा अंत में हाजीपुर सीट को लेकर चिराग को समर्थन दे सकती है. ऐसे में पारस ने इस समय से इंडिया गठबंधन को भी साधने का प्रयास शुरू कर दिया है. जिससे जरूरत होने पर वह अपने गुट के सांसदों के साथ इंडिया गठबंधन के साथ मिलकर चुनाव लड़ पाएं.

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Effect of India alliance will be visible in DUSU elections, NUSI and left student organizations will fight together https://www.delhiaajkal.com/effect-of-india-alliance-will-be-visible-in-dusu-elections-nusi-and-left-student-organizations-will-fight-together/ https://www.delhiaajkal.com/effect-of-india-alliance-will-be-visible-in-dusu-elections-nusi-and-left-student-organizations-will-fight-together/#respond Tue, 12 Sep 2023 14:15:23 +0000 https://www.delhiaajkal.com/?p=2523

डूसू चुनाव में दिखेगा इंडिया गठबंधन का असर, मिलकर लड़ेंगे एनयूएसआई और वाम छात्र संगठन

दिल्ली आजकल ब्यूरो, दिल्ली
12 सितंबर 2023

डूसू चुनाव में भी विपक्षी दलो के राष्ट्रीय गठबंधन इंडिया एलायंस का असर देखने को मिल सकता है. इसकी वजह यह है कि भाजपा से संबद्ध छात्र संगठन अखिल भारतीय विदयार्थी परिषद को हराने के लिए एनएसयूआई और वाम दलों की छात्र इकाइयो ने मिलकर चुनाव लड़ने का निश्चय किया है.

वाम दलों की छात्र इकाई से जुड़े एक नेता ने कहा कि फिलहाल सीटों पर फैसला नहीं हुआ है. लेकिन जिस तरह से राष्ट्रीय स्तर पर हमारे मुख्य दल मिलकर भाजपा को रोकने का प्रयास कर रहे हैं. उसी तरह से हम दिल्ली विश्वविदयालय छात्र संघ चुनाव में एबीवीपी को रोकने की रणनीति पर काम कर रहे हैं. जल्द ही इसको लेकर फैसला हो सकता है.

इस बीच 22 सितंबर को होने वाले डूसू चुनाव के लिए किसी भी दल ने फिलहाल तक अपने उम्मीदवार घोषित नहीं किये हैं. हालांकि कैंपस में सभी छात्र संगठनो ने अपना प्रचार शुरू कर दिया है. एबीवीपी ने अपने संभावित 9 उम्मीदवारों का एक पैनल घोषित किया है. इसमें से चार को अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, सचिव, संयुक्त सचिव पद का अधिकृत उम्मीदवार घोषित किया जाएगा.

पिछले बार आम आदमी पार्टी की छात्र इकाइ सीवाईएसएस ने वाम दलों के छात्र संगठन के साथ मिलकर चुनाव लड़ा था. जिसमें उसे भारी पराजय देखनी पड़ी थी. इस बार सीवाईएसएस ने चुनाव नहीं लड़ने का निर्णय किया है. यह कहा जा रहा है कि कैंपस में निष्क्रियता और संगठन नहीं होने की वजह से उसने यह निर्णय किया है. 

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India alliance excited by Samajwadi Party’s victory in Ghosi by-election, Congress had not given candidate against BJP https://www.delhiaajkal.com/india-alliance-excited-by-samajwadi-partys-victory-in-ghosi-by-election-congress-had-not-given-candidate-against-bjp/ https://www.delhiaajkal.com/india-alliance-excited-by-samajwadi-partys-victory-in-ghosi-by-election-congress-had-not-given-candidate-against-bjp/#respond Sat, 09 Sep 2023 04:00:44 +0000 https://www.delhiaajkal.com/?p=2451

घोसी उपचुनाव में समाजवादी पार्टी की जीत से इंडिया गठबंधन उत्साहित,  कांग्रेस ने भाजपा के खिलाफ नहीं दिया था उम्मीदवार 

दिल्ली आजकल ब्यूरो , दिल्ली 

8 सितंबर 2023

देश के 6 राज्यों की 7 विधानसभा सीटों पर हुए उपचुनाव में विपक्षी गठबंधन ‘इंडिया’ को बड़ी सफलता मिली है. विपक्षी गठबंधन ने 7 में से 4 सीटों पर जीत दर्ज की है. खासकर, उत्तरप्रदेश की घोसी विधानसभा सीट पर हुए उपचुनाव में भाजपा उम्मीदवार दारा सिंह चौहान को सपा उम्मीदवार सुधाकर सिंह के हाथों करारी मात मिली है. 

घोसी उपचुनाव में कांग्रेस ने अपना उम्मीदवार नहीं उतारा था. कांग्रेस ने अलिखित रूप से सपा का समर्थन किया था. वही, उत्तर प्रदेश सरीखे महत्वपूर्ण सूबे में घोसी सीट पर हुए उपचुनाव में मिली पराजय भाजपा के लिए बड़ा झटका है. आगामी 2024 आम चुनाव में भाजपा की सबसे बड़ी उम्मीद उत्तर प्रदेश से ही है. लेकिन लोकसभा चुनाव में उतरने से पहले ही घोसी उपचुनाव में मिली करारी हार भाजपा के लिए शुभ संकेत नहीं माना जा रहा है.

उपचुनाव नतीजों में भाजपा ने त्रिपुरा की दोनों सीटों पर कब्जा जमा लिया है. वहीं उत्तराखंड की बागेश्वर सीट एक बार फिर से भाजपा की झोली में आ गई है.भाजपा उम्मीदवार पार्वती दास ने इस सीट पर 2400 वोटों से जीत दर्ज की है.

जबकि, केरल की पुथुपल्ली सीट पर कांग्रेस ने एक बार फिर से झंडा फहरा दिया है. उधर, पश्चिम बंगाल की धूपगुड़ी सीट पर भी विपक्षी गठबंधन के घटक दल तृणमूल कांग्रेस ने जीत दर्ज की है. तृणमूल कांग्रेस के उम्मीदवार निर्मलचंद राय ने भाजपा की तापसी राय को मात दी है. 

झारखंड के डुमरी विधानसभा क्षेत्र में भी विपक्षी गठबंधन ‘इंडिया’ के घटक झारखंड मुक्ति मोर्चा की जीत हुई है. झामुमो उम्मीदवार बेबी देवी ने ऑल झारखंड स्टूडेंट्स यूनियन (आजसू) की यशोदा देवी को हरा दिया है. 

जबकि, उत्तर प्रदेश की घोसी विधानसभा सीट पर जारी मतगणना में समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार सुधाकर सिंह लगातार बीजेपी के दारा सिंह चौहान से आगे हैं.

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Sonia Gandhi’s letter to PM Modi before the special session, demanding discussion on nine issues in the session https://www.delhiaajkal.com/sonia-gandhis-letter-to-pm-modi-before-the-special-session-demanding-discussion-on-nine-issues-in-the-session/ https://www.delhiaajkal.com/sonia-gandhis-letter-to-pm-modi-before-the-special-session-demanding-discussion-on-nine-issues-in-the-session/#respond Wed, 06 Sep 2023 16:54:41 +0000 https://www.delhiaajkal.com/?p=2409

विशेष सत्र से पहले सोनिया गांधी की पीएम मोदी को चिट्ठी, सत्र में नौ मुद्दों पर चर्चा की मांग

दिल्ली आजकल ब्यूरो , दिल्ली

6 सितंबर 2023

कांग्रेस संचार विभाग के महासचिव जयराम रमेश ने संसद के विशेष सत्र को लेकर कहा कि इंडिया गठबंधन सदन का बहिष्कार नहीं करेगा और गठबंधन की तरफ से जनता से जुड़े जरूरी मुद्दे उठाएंगे . विपक्ष से बिना चर्चा किए विशेष सत्र बुलाने पर सीपीपी चेयरपर्सन सोनिया गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र भी लिखा है. सोनिया गांधी ने पत्र में जनता से जुड़े नौ मुद्दों का जिक्र करते हुए कहा कि इन मुद्दों पर सदन में चर्चा की जाए.

कांग्रेस संचार विभाग के महासचिव जयराम रमेश ने बुधवार को कांग्रेस मुख्यालय में यह जानकारी दी. जयराम रमेश ने कहा कि संसद जनता की परेशानियों को सभी के सामने रखने का हमारे लिए एक मौका है और इस विशेष सत्र में हर पार्टी अलग-अलग मुद्दे संसद में रखने का प्रयास करेगी.

जयराम रमेश ने कहा कि सरकार द्वारा विपक्ष से बिना चर्चा किए संसद का विशेष सत्र बुलाया गया है. इस पर सोनिया गांधी ने पीएम मोदी को पत्र भी लिखा है. सोनिया गांधी ने पत्र में कहा है कि यह सत्र बिना किसी वार्ता के मनमाने ढंग से बुलाया गया है. विशेष सत्र के एजेंडे की जानकारी किसी के पास नहीं है. लोकसभा और राज्‍यसभा के बुलेटिन में विशेष सत्र के पांचों दिन गवर्नमेंट बिजनेस के लिए एलोकेट किए गए हैं. अपने पत्र में उन्होंने नौ मुद्दों का जिक्र करते हुए कहा कि इन मुद्दों पर सदन में चर्चा हो. 

सोनिया गांधी ने पत्र में कहा कि विशेष सत्र में महंगाई, बेरोजगारी और एमएसएमई के संकट पर चर्चा की जाए. सरकार ने एमएसपी को कानूनी गारंटी देने की बात की थी. उसकी मौजूदा स्थिति पर बात हो. अडानी मामले में जेपीसी की मांग पर चर्चा हो. जातीय जनगणना पर चर्चा हो. संघीय ढांचों पर हो रहे हमले और गैर भाजपा शासित राज्यों को उनके अधिकारों से वंचित किए जाने पर चर्चा की जाए. हिमाचल प्रदेश में आई बाढ़ जैसी आपदा और कई राज्यों में बनी अत्यधिक सूखे की स्थिति पर बात हो. लद्दाख-अरुणाचल प्रदेश की सीमा पर चीन के अतिक्रमण पर चर्चा हो. हरियाणा जैसे अनेक राज्यों में फैले साम्प्रदायिक तनाव पर बात हो. मणिपुर की हिंसा पर सरकार स्थिति स्पष्ट करे.

जयराम रमेश ने कहा कि यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि विशेष सत्र के एजेंडे, कार्यसूची की जानकारी किसी के पास नहीं है. पहली बार ऐसा हो रहा है कि हमारे पास एजेंडे का कोई विवरण नहीं है. इंडिया गठबंधन अपने मुद्दे उठाना चाहता है. सिर्फ सरकारी एजेंडे के आधार पर विशेष सत्र नहीं होना चाहिए. सिर्फ गवर्नमेंट बिजनेस को हम स्वीकार नहीं करते. ये नामुमकिन है और परंपरा के खिलाफ है. सरकार अपने एजेंडे के बारे में बैठक बुलाए, विपक्ष से बातचीत करे. सरकार जो विधेयक पास कराना चाहती है. उनके बारे में पहले बातचीत करे.

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Ajay Maken appointment in CWC gives Congress Delhi’s Future Politics Indications https://www.delhiaajkal.com/ajay-maken-appointment-in-cwc-gives-congress-delhis-future-politics-indications/ https://www.delhiaajkal.com/ajay-maken-appointment-in-cwc-gives-congress-delhis-future-politics-indications/#respond Thu, 24 Aug 2023 10:19:10 +0000 https://www.delhiaajkal.com/?p=2176

अजय माकन को कार्यसमिति में शामिल कर दिल्ली—पंजाब की राजनीति पर कांग्रेस का बड़ा संदेश

दिल्ली आजकल ब्यूरो, दिल्ली
21 अगस्त 2023

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने कांग्रेस की पुनर्गठित कार्यसमिति का ऐलान कर कई संदेश दिए हैं. उन्होंने इसमें 6 ओबीसी, 9 एससी और महेंद्रजीत सिंह मालवीय जैसे आदिवासी चेहरे को शामिल कर यह बताया है कि कांग्रेस ने भाजपा की ओबीसी—दलित—पिछड़ा वोट बैंक रणनीति की काट निकालने का प्रयास किया है.

कार्यसमिति में अजय माकन को शामिल कर कांग्रेस नेतृत्व ने दिल्ली और पंजाब को लेकर भी बड़ा संदेश दिया है. माकन शुरू से दिल्ली और पंजाब में आम आदमी पार्टी के साथ किसी भी तरह के तालमेल के खिलाफ रहे हैं. उन्होंने खुले तौर पर कहा था कि आम आदमी पार्टी के साथ किसी भी तरह का समझौता कांग्रेस के लिए आत्मघाती होगा. यह माना जा रहा है कि अजय माकन को कार्यसमिति में शामिल कर कांग्रेस ने पंजाब और दिल्ली को लेकर बड़ा संदेश दे दिया है.

जानकार मानते हैं कि माकन को शामिल कर कांग्रेस ने यह बताने का कार्य किया है कि वह इस समय भले ही इंडिया गठबंधन में आम आदमी पार्टी को शामिल करने पर सहमत है. लेकिन आने वाले समय में वह अपने दिल्ली के नेता की सलाह पर अमल कर सकती है. वह पूरी तरह से आम आदमी पार्टी के साथ समझौता को लेकर कदम नहीं बढ़ाएगी. यह कहा जा रहा है कि कांग्रेस ने अजय माकन को कार्यसमिति में शामिल कर यह भी संदेश दिया है कि आने वाले समय में एक बार फिर अजय माकन ही दिल्ली में उसका चेहरा होंगे. वह अपने इस सबसे भरोसेमंद चेहरे को आगे करके ही दिल्ली की राजनीति में अपनी वापसी की रणनीति बनाएगी.

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