Free Directory – Delhi Aaj Kal https://www.delhiaajkal.com Delhi Ki Awaaz Wed, 02 Nov 2022 19:47:12 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=6.7.1 https://i0.wp.com/www.delhiaajkal.com/wp-content/uploads/2022/11/Black-minimalist-michael-vescera-logo.png?fit=32%2C32&ssl=1 Free Directory – Delhi Aaj Kal https://www.delhiaajkal.com 32 32 212602069 अटल इनोवेशन मिशन के विस्तार को मंजूरी दी, दस हजार अटल टिंकरिंग, 101 अटल इन्क्यूबेशन सेंटर; 50 अटल कम्युनिटी इनोवेशन सेंटर स्थापित किए जायेंगे https://www.delhiaajkal.com/%e0%a4%85%e0%a4%9f%e0%a4%b2-%e0%a4%87%e0%a4%a8%e0%a5%8b%e0%a4%b5%e0%a5%87%e0%a4%b6%e0%a4%a8-%e0%a4%ae%e0%a4%bf%e0%a4%b6%e0%a4%a8-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%b5%e0%a4%bf%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%a4/ https://www.delhiaajkal.com/%e0%a4%85%e0%a4%9f%e0%a4%b2-%e0%a4%87%e0%a4%a8%e0%a5%8b%e0%a4%b5%e0%a5%87%e0%a4%b6%e0%a4%a8-%e0%a4%ae%e0%a4%bf%e0%a4%b6%e0%a4%a8-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%b5%e0%a4%bf%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%a4/#respond Wed, 02 Nov 2022 19:47:12 +0000 https://highfaz.com/delhiajkl/?p=1182 8 April 2022

संदीप जोशी , दिल्ली

प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने अटल इनोवेशन मिशन (एआईएम) को मार्च 2023 तक जारी रखने की मंजूरी दे दी है. एआईएम देश में एक नवाचार की संस्कृति और उद्यमशीलता से संबंधित इकोसिस्टम विकसित करने के अपने अभीष्ट लक्ष्य पर काम करेगा. एआईएम द्वारा यह काम अपने विभिन्न कार्यक्रमों के माध्यम से किया जाएगा.

एआईएम द्वारा प्राप्त किए जाने वाले अभीष्ट लक्ष्य हैं

• 10,000 अटल टिंकरिंग लैब (एटीएल) की स्थापना करना,

• 101 अटल इन्क्यूबेशन सेंटर (एआईसी) की स्थापना करना,

• 50 अटल कम्युनिटी इनोवेशन सेंटर (एसीआईसी) की स्थापना करना और

• अटल न्यू इंडिया चैलेंजेज के माध्यम से 200 स्टार्टअप को सहायता प्रदान करना।

उपरोक्त सेंटरों की स्थापना और लाभार्थियों को सहायता प्रदान करने की इस प्रक्रिया में कुल 2,000 करोड़ रुपये से अधिक का निर्धारित बजट खर्च किया जाएगा.

अटल इनोवेशन मिशन को  वित्त मंत्री द्वारा वर्ष 2015 के बजट भाषण में की गई घोषणा के अनुरूप नीति आयोग के तहत स्थापित किया गया है. एआईएम का मुख्य उद्देश्य स्कूल, विश्वविद्यालय, अनुसंधान संस्थानों, सूक्ष्य, लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) और उद्योगों के स्तरों पर विभिन्न उपायों के माध्यम से देश भर में नवाचार और उद्यमिता का एक इकोसिस्टम बनाना और उसे बढ़ावा देना है. एआईएम ने बुनियादी ढांचे के निर्माण और संस्थानों निर्माण दोनों पर ध्यान केंद्रित किया है. जैसा कि निम्नलिखित उदाहरणों से स्पष्ट है. एआईएम ने राष्ट्रीय और वैश्विक, दोनों स्तर पर नवाचार से जुड़े इकोसिस्टम को एकीकृत करने की दिशा में काम किया है.

एआईएम ने नवाचार और उद्यमिता के मामले में सहक्रियात्मक सहयोग विकसित करने के लिए विभिन्न अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों के साथ द्विपक्षीय संबंध बनाए हैं. जिनमें रूस के साथ एआईएम– एसआईआरआईयूएस छात्र नवाचार विनिमय कार्यक्रम, डेनमार्क के साथ एआईएम– आईसीडीके (इनोवेशन सेंटर डेनमार्क) वाटर चैलेंज और ऑस्ट्रेलिया के साथ आईएसीई (इंडिया ऑस्ट्रेलियन सर्कुलर इकोनॉमी हैकाथॉन) शामिल हैं.

एआईएम ने भारत और सिंगापुर के बीच आयोजित एक इनोवेशन स्टार्टअप समिट, इन्स्प्रेन्योर, की सफलता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई.

 एआईएम ने रक्षा नवाचार संगठन, जोकि रक्षा के क्षेत्र में नवाचार के साथ-साथ खरीद को बढ़ावा दे रहा है, की स्थापना के लिए रक्षा मंत्रालय के साथ भागीदारी की.

पिछले कुछ वर्षों में, एआईएम ने देश भर की नवाचार की गतिविधियों को एकीकृत करने के लिए एक संस्थागत तंत्र प्रदान करने के लिए काम किया है. अपने विभिन्न कार्यक्रमों के माध्यम से इसने लाखों स्कूली बच्चों में नवाचार के प्रति रुचि पैदा की है. एआईएम समर्थित स्टार्टअप ने सरकारी और निजी इक्विटी निवेशकों से 2,000 करोड़ रुपये से अधिक की राशि जुटाई है और कई हजार नौकरियां पैदा की हैं. एआईएम ने राष्ट्रीय हित के विभिन्न विषयों से संबंधित नवाचार की चुनौतियों का भी समाधान किया है. एआईएम के कार्यक्रमों में 34 राज्यों एवं केन्द्र – शासित प्रदेशों को शामिल किया गया है. जिसका लक्ष्य नवाचार से जुड़े इकोसिस्टम में अधिक से अधिक भागीदारी को प्रेरित करते हुए भारत के जनसांख्यिकीय लाभांश का फायदा उठाना है.

केन्द्रीय मंत्रिमंडल द्वारा जारी रखे जाने की मंजूरी मिलने के साथ, एआईएम के जिम्मे नवाचार से संबंधित एक ऐसा समावेशी इकोसिस्टम बनाने का एक और भी बड़ा दायित्व आ गया है. जिसमें नवाचार और उद्यमिता की गतिविधियों में संलग्न होना लगातार आसान होता जाए.

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स्वदेश में विकसित प्लेटिनम-आधारित इलेक्ट्रोकैटलिस्‍ट कम लागत वाली टिकाऊ फ्यूल सेल के लिए मार्ग कर सकती है प्रशस्त https://www.delhiaajkal.com/%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%b5%e0%a4%a6%e0%a5%87%e0%a4%b6-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%b5%e0%a4%bf%e0%a4%95%e0%a4%b8%e0%a4%bf%e0%a4%a4-%e0%a4%aa%e0%a5%8d%e0%a4%b2%e0%a5%87%e0%a4%9f%e0%a4%bf/ https://www.delhiaajkal.com/%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%b5%e0%a4%a6%e0%a5%87%e0%a4%b6-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%b5%e0%a4%bf%e0%a4%95%e0%a4%b8%e0%a4%bf%e0%a4%a4-%e0%a4%aa%e0%a5%8d%e0%a4%b2%e0%a5%87%e0%a4%9f%e0%a4%bf/#respond Wed, 02 Nov 2022 13:27:19 +0000 https://highfaz.com/delhiajkl/?p=1179 22 March 2022

संदीप जोशी , दिल्ली

भारतीय वैज्ञानिकों ने एक कुशल प्रक्रिया से फ्यूल सेल में उपयोग के लिए प्लैटिनम आधारित इलेक्ट्रोकैटलिस्ट स्वदेश में विकसित किया है. इस इलेक्ट्रोकैटलिस्ट ने व्यावसायिक रूप से उपलब्ध इलेक्ट्रोकैटलिस्ट को तुलनीय गुण का मार्ग दिखाया और यह फ्यूल सेल के ढेर के शीघ्रता के साथ ठीक-ठाक काम करने की क्षमता को बढ़ा सकता है. 

अगस्त 2021 में हाइड्रोजन मिशन के शुभारंभ ने हाइड्रोजन फ्यूल सेल के क्षेत्र में स्वदेशी अनुसंधान और विकास के लिए एक बड़ा रास्ता खोल दिया है. फ्यूल सेल ऊर्जा रूपांतरण विधि है. जो पानी के साथ हाइड्रोजन से गौण उत्‍पाद के रूप में डीसी बिजली तैयार करती है.

हांलाकि इस टेक्‍नोलॉजी की हरित ऊर्जा उत्‍पादन में अनेक विशेषताएं हैं. लेकिन मुख्‍य कमी उपकरण का निर्माण करने के लिए कलपुर्जों के आयात पर होने वाला भारी खर्च है. खासतौर से प्‍लेटिनम आधारित इलेक्ट्रोकैटलिस्ट, जिसे उनके निर्माण के लिए उपयुक्त स्वदेशी प्रौद्योगिकियों की कमी के कारण आयात किया जाता है. टिकाऊपन बढ़ाने और फ्यूल सेल की लागत को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है.

विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग, भारत सरकार के स्‍वायत्‍तशासी अनुसंधान और विकास केन्‍द्र  इंटरनेशनल एडवांस्ड रिसर्च सेंटर फॉर पाउडर मेटलर्जी एंड न्यू मैटीरियल्स (एआरसीआई) के वैज्ञानिकों ने एक कुशल प्रक्रिया का उपयोग करके प्लैटिनम आधारित इलेक्ट्रोकैटलिस्ट को विभिन्‍न वस्‍तुओं को मिलाकर तैयार किया है. साधारण सामग्री की प्रतिक्रिया से रासायनिक यौगिक तैयार करने का महत्‍वपूर्ण कदम मजबूत धातु सब्सट्रेट परस्‍पर क्रिया (एसएमएसआई) के रूप में मशहूर कार्बन से लेकर प्‍लेटिनम तक परस्‍पर क्रिया को बढ़ाना है. जिससे इलेक्ट्रोकैटलिस्ट के टिकाऊपन में वृद्धि होती है.

इस इलेक्ट्रोकैटलिस्ट ने फ्यूल सेल में अपने प्रदर्शन और बेहतर विनाशन प्रतिरोध और टिकाऊपन के संदर्भ में व्यावसायिक रूप से उपलब्ध इलेक्ट्रोकैटलिस्ट के तुलनीय गुण दिखाए. इसने 20 प्रतिशत से कम दिखाया, जो उत्प्रेरक (40 प्रतिशत) के सक्रिय सतह क्षेत्र में नुकसान की स्वीकार्य सीमा से कम है. यह फ्यूल सेल स्टैक प्रदर्शन के जीवनकाल को बढ़ा सकता है. इसे ‘इंटरनेशनल जर्नल ऑफ हाइड्रोजन एनर्जी’ में प्रकाशित किया गया है और एक पेटेंट दायर किया गया है (पेटेंट संख्या: 202011035825).

रसायन, फार्मास्यूटिकल्स और संबद्ध उद्योगों के लिए संयंत्रों के डिजाइन और निर्माण में लगी मुंबई की एक कंपनी लास इंजीनियर्स एंड कंसल्टेंट्स प्राइवेट लिमिटेड (एलईसीपीएल) इस इलेक्ट्रोकैटलिस्ट के निर्माण के लिए एआरसीआई की जानकारी हासिल करने की प्रक्रिया में है.

एआरसीआई के निदेशक (अतिरिक्त प्रभार) डॉ टाटा नरसिंग राव के अनुसार स्वदेशी इलेक्ट्रोकैटलिस्ट का यह व्यावसायीकरण भारत में हरित हाइड्रोजन टेक्‍नोलॉजी को आगे बढ़ाता है.

एआरसीआई-चेन्नई के क्षेत्रीय निदेशक डॉ. आर. गोपालन का मानना है कि स्वदेशी उत्प्रेरक आयातित इलेक्ट्रोकैटलिस्ट्स पर निर्भरता को कम कर सकते हैं और आत्मनिर्भर भारत का मार्ग प्रशस्त करेंगे.

सेंटर फॉर फ्यूल सेल टेक्नोलॉजी, एआरसीआई-चेन्नई में इस प्रकार की टेक्‍नोलॉजी के एक अविष्‍कारक डॉ रमन वेदराजन का मानना है कि भारत में निर्मित टिकाऊ पॉलीमर इलेक्ट्रोलाइट मेम्ब्रेन फ्यूल सेल स्टैक सुनिश्चित करने के लिए इसे विकसित करना महत्व रखता है. एलईसीपीएल के निदेशक  संतोष तिवारी ने कहा “हमें फ्यूल सेल घटक निर्माण के लिए एआरसीआई का औद्योगिक भागीदार होने पर गर्व है.”

हम हाइड्रोजन पर आधारित स्वच्छ ऊर्जा के साझा लक्ष्यों को साझा करते हैं और “मेक इन इंडिया” पहल इस क्षेत्र में एक सफलता है. एआरसीआई तकनीकी जानकारी का व्यावसायीकरण अगली तिमाही में शुरू होने की उम्मीद है. प्लेटिनम-आधारित इलेक्ट्रोकैटलिस्ट के लिए अन्य एप्‍लीकेशन्‍स के लिए भी जोखिम उठाया जा रहा है. 

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