petrol

संदीप जोशी, दिल्ली, 27 फरवरी 2022

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने शनिवार को हुई अपनी बैठक में यह निर्णय किया है कि अगर यूक्रेन—रूस युद्ध की वजह से पेट्रोल—डीजल के दामों में तेजी आती है तो उसे थामने के लिए सरकार अपने रणनीतिक तेल भंडार से पेट्रोलियम कंपनियो को तेल देगी. सरकार ने देश में तीन स्थानों विशाखापटटनम, मंगलुरू और पादुर में 5.33 मिलियन मिट्रिक टन कच्चा तेल जमा कर रखा है. यह देश की 9.5 दिनों की जरूरत पूरा करने में सक्षम है. यूक्रेन—रूस के युद्ध की वजह से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत आश्चर्यजनक रूप से 105 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई है. यह पिछले सात साल में सबसे अधिक है. हाल तक यह कीमत 92—95 प्रति डॉलर थी. ऐसे में यह माना जा रहा है कि अगर दाम इसी स्तर पर स्थिर रहे तो भारत में पेट्रोल—डीजल की कीमत 125 रूपये प्रति लीटर तक पहुंच सकते हैं. यह कहा जा रहा है कि सरकार का आकलन है कि ऐसा होने पर उसके लिए राजनीतिक रूप से स्थितियां असहज हो जाएगी. इस स्थिति से निपटने के लिए उसे वैकल्पिक उपाय करने होंगे. जिससे तेल के दामों को स्थिर बनाए रखने में उसे मदद हासिल हो पाए..

केंद्रीय कैबिनेट ने अपनी बैठक में फैसला किया कि वह एक ओर जहां रणनीतिक तेल भंडार से तेल पेट्रोलियम कंपनियों को देगी. वहीं दूसरी ओर, वह दुनिया के अन्य मुल्कों से भी तेल खरीदेगी. जिससे  आपूर्ति—खपत में कोई बड़ा अंतर न आने पाए. यह भी कहा जा रहा है कि भारत ने रूस से कच्चा तेल खरीदने के प्रयास भी शुरू कर दिए हैं. हालांकि सरकार ने इसको लेकर कोई भी अधिकारिक बयान नहीं दिया है. एक अधिकारी ने कहा कि रणनीतिक तेल भंडार को उस समय भरा जाता है. जब दुनिया में तेल के दाम न्यूनतम होते हैं. यही वजह है कि अगर सरकार इससे पेट्रोलियम कंपनियों को तेल सप्लाई करती है तो वह काफी कम दाम पर होगा. जिससे तेल के दाम में बहुत अधिक इजाफा नहीं होगा. केंद्र सरकार ने पिछले साल 3874 करोड़ रूपये खर्च कर तीनों रणनीतिक भूमिगत तेल भंडार को 1.671 करोड़ बैरल कच्चा तेल भरा था. इससे देश को उस समय करीब 5 हजार करोड़ रूपये की बचत हुई थी. इसकी वजह यह थी कि तेल कम दाम पर खरीदकर भंडार में जमा किया गया था..

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