
विनय कुमार, दिल्ली
26 मार्च 2022
समाजवादी पार्टी में वर्चस्व और अहम की लड़ाई फिर से शुरू होती हुई दिख रही है. विधानसभा चुनाव खत्म् होते ही चाचा शिवपाल यादव और भतीजा अखिलेश यादव के बीच खींचतान शुरू हो गई है. समाजवादी पार्टी के विधायक दल की बैठक गई थी. लेकिन इसमें शिवपाल यादव नहीं आए. जब उनसे इसको लेकर सवाल किया गया कि वह क्यों नहीं आए तो उन्होंने बिना लाग—लपेट कहा कि उनको बुलाया नहीं गया था. ऐसे में वह बैठक में क्यों और कैसे जाते.
यह बैठक काफी अहम थी. इसकी वजह यह थी कि इसमें सपा के विधायक दल का नेता चुना जाना था. इसमें सपा के मुखिया अखिलेश यादव ने स्वयं ही विपक्ष के नेता की कमान अपने हाथ में ले ली. वह नेता प्रतिपक्ष होंगे. यह माना जा रहा है कि शिवपाल यादव को जानबूझकर बैठक में नहीं बुलाया गया था. इसकी वजह यह थी कि अखिलेश यादव गुट को यह आशंका थी कि अगर वह बैठक में होंगे तो विधायक दल के नेता के रूप में उनके समर्थक उनका नाम प्रस्तावित कर सकते थे. जिससे अखिलेश के लिए असहज स्थिति उत्पन्न हो सकती थी. यही वजह है कि शिवपाल यादव को इस बैठक की जानकारी नहीं दी गई थी. सपा की ओर से तय विधायक दल के नेता को ही नेता प्रतिपक्ष का पद हासिल होगा. यह भी भी पहले से ही तय था. इसकी वजह यह है कि सपा ही उप्र में सबसे बड़ा विपक्षी राजनीतिक दल है.
यह कहा जा रहा है कि इस बैठक में शामिल होने के लिए शिवपाल यादव इटावा से लखनऊ आ गए थे. लेकिन उन्हें लखनऊ में होने के बाद भी इस बैठक में शामिल होने के लिए किसी ने सूचना नहीं दी. जिससे वह काफी नाराज भी बताए जा रहे हैं. शिवपाल यादव ने संवाददाताओं से बात करते हुए अपनी नाराजगी जाहिर भी की है. उन्होंने कहा कि सभी विधायकों को पार्टी कार्यालय से फोन किया गया. लेकिन उन्हें कोई कॉल नहीं आया. इसके साथ ही आगे के कदम के बारे में बात करते हुए उन्होंने कहा कि वह जल्द ही इसको लेकर जानकारी साझा करेंगे.
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में अखिलेश यादव ने मैनपुरी की करहल सीट से चुनाव लड़ा और जीत भी दर्ज की. वह आजमगढ़ से सांसद भी थे. उन्होंने अपनी विधायकी के लिए लोकसभा से इस्तीफा दे दिया है. इससे पहले विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष राम गोविंद चौधरी हुआ करते थे लेकिन इस बार के चुनाव में वह जीत दर्ज करने में सफल नहीं हो पाए.